हिन्दी भाषा-साहित्य : व्याप्ति और भविष्य
दिनांक 11/09/2025

दिनांक 11/09/2025 को भारतीय हिन्दी परिषद्, प्रयागराज एवं हिन्दी विभाग-पं० पृथी नाथ (पी०जी०) महाविद्यालय, कानपुर के संयुक्त तत्वावधान में हिन्दी भाषा-साहित्य : व्याप्ति और भविष्यविषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह विषय समसामयिक परिप्रेक्ष्य में हिन्दी की वैश्विक स्थिति एवं भावी संभावनाओं पर केन्द्रित था। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रो० हेमांशु सेन एवं विशिष्ट वक्ता प्रो० योगेन्द्र प्रताप सिंह जी थे। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो० अनूप कुमार सिंह ने वक्ताओं का स्वागत करते हुए विषय के संदर्भ में कहा कि ‘हिन्दी भाषा भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जिसकी व्याप्ति विश्वभर में फैल रही है और भविष्य में इसकी संभावनाएँ और प्रबल होंगी।’

प्रो० हेमांशु सेन ने भी अपने संबोधन में कहा कि ‘हिन्दी अब केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बोली और पढ़ी जा रही है। सोशल मीडिया, इंटरनेट और फिल्मों के कारण इसकी पहचान और भी बढ़ रही है, आज हिन्दी वैश्विक भाषा के रूप मे प्रतिष्ठित हो चुकी है।’

प्रो० योगेन्द्र प्रताप सिंह ने हिन्दी की व्याप्ति और भविष्य पर अपने विचार रखते हुए कहा कि ‘वर्तमान में डिजिटल युग ने हिन्दी को वैश्विक मंच प्रदान किया है, जिससे इसकी पहुंच और भी विस्तृत हुई है। भविष्य में हिन्दी भाषा और साहित्य की प्रासंगिकता और भी बढ़ेगी, क्योंकि यह एक ओर अपनी परंपरागत जड़ों से जुड़ा है तो दूसरी ओर आधुनिक विज्ञान, तकनीक और वैश्विक संचार की आवश्यकताओं को भी आत्मसात करने में सक्षम है।’

उक्त कार्यक्रम छात्रों के लिए बहुआयामी रहा है। उनमें मातृभाषा के प्रति गर्व और सम्मान की भावना जागृत एवं उसकी समृद्ध परंपरा से उनका परिचय हुआ। छात्रों को डिजिटल युग में हिन्दी की बढ़ती उपयोगिता, भाषा प्रौद्योगिकी, समकालीन साहित्य और अनुवाद अध्ययन जैसे क्षेत्रों में शोध की नवीन संभावनाओं का ज्ञान प्राप्त हुआ, साथ ही आधुनिक मीडिया, पत्रकारिता और डिजिटल प्लेटफार्म में हिन्दी के व्यापक प्रयोग को देखते हुए उन्हें कैरियर की नयी दिशाओं का बोध हुआ। वक्ताओं ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भाषा प्रौद्योगिकी में प्रयोग, मशीनी अनुवाद की चुनौतियाँ, सोशल मीडिया पर भाषा के बदलते स्वरूप और वैश्विक स्तर पर हिन्दी की स्थिति जैसे विषयों पर गहन अनुसंधान की आवश्यकता है। भाषा नीति, शिक्षा में हिन्दी की भूमिका, और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में इसकी संभावनाओं पर शोधकार्य हिन्दी के भविष्य को दिशा प्रदान कर सकते हैं।

कार्यक्रम का संचालन  कार्यक्रम संयोजक डॉ० अनूप कुमार सिंह द्वारा एवं धन्यवाद ज्ञापन विभाग प्रभारी प्रो० निधि कश्यप द्वारा किया गया। इस महत्त्वपूर्ण शैक्षणिक आयोजन में प्रो० बादल बिस्वास, प्रो० ए० के० सिंह, प्रो० मधुर बाला यादव, प्रो० सुमन सिंह, प्रो० आभा सिंह, प्रो० आरती विश्नोई, प्रो० के० के० यादव, प्रो० सतीश चन्द्र, प्रो० धनंजय सिंह, डॉ० अलका अस्थाना, डॉ० चंचल शर्मा,  डॉ० अनुज मिश्र, डॉ० सुधा अग्रवाल, डॉ० राम नरेश पटेल, डॉ० शैलेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ० दिनेश कुमार यादव इत्यादि उपस्थित रहे। साथ ही महाविद्यालय तथा अन्य महाविद्यालयों के 28 शोधार्थी एवं लगभग 70 छात्र-छात्राओं ने अत्यन्त उत्साह के साथ उपस्थित होकर कार्यक्रम की सफलता में अपना अमूल्य योगदान प्रदान किया। यह व्याख्यान हिन्दी भाषा एवं साहित्य की समसामयिक स्थिति तथा भावी सम्भावनाओं पर एक गम्भीर शैक्षणिक विमर्श था।